Promoting एक मुट्ठी राख with tea

नमस्कार मित्रों ।

मैं एक पूर्व नौ सैनिक के नाते आपका समर्थन तथा हौसला अफजाही को लालायित हूं। आपकी तरफ आशामयी निगाहों से देखता हूं । आप मेरी पुस्तक " *एक मुट्ठी राख* " को कृपया खरीदें और पढ़ें। आपका मानसिक तथा भौतिक समर्थन एवम साथ मुझे चाहिए। साहित्य जगत में स्थापित होने के लिए मुझे आपका स्नेह चाहिए। आशीर्वाद चाहिए। कीमत मामूली है। मेरा ध्येय रॉयल्टी कमाना नहीं अपितु अपने विचारों को उस क्षितिज पर पहुंचाना है जहां का सूरज हमें मामूली समझा जाता है। अगस्त महीने में मेरी अगली पुस्तक *"चाक चुम्बन"* भी आ रही है। जो लोकतंत्र की लचर व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने को सज्ज होगा।
धन्यवाद

रचनाएँ प्रश्तुतीकरण

जय हिन्द सर। मैं UCO Bank में कार्यरत हूं। मैं संतोष सिंह ' राख ' के नाम से कविताएं लिखता चला आ रहा हूं। हाल ही में, मेरी पहली पुस्तक ' एक मुट्ठी राख ' कविता संग्रह Zorba publications गुरुग्राम, नई दिल्ली से प्रकाशित हुई है। पुस्तक Amazon, Flipkart, Snapdeal, ShopClues तथा अन्य ऑनलाइन stores पर available है । पुस्तक में पन्द्रह कविताएं हैं जो दर्शन के अलावा जीवन के अन्य पहलुओं से आपको मुखातिब करेगा। जरूर खरीदे, जरूर पढ़े।

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